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Thursday, 7 April 2016
Wednesday, 6 April 2016
बुलन्द मस्जिद स्कूल में पीजीटी के स्थायी शिक्षकों को भेजने की मांग
- दो वर्ष बाद बनाई गई है पीजीटी की पोस्ट परंतु उनकी नियुक्ति कब तक होगी पता नहीं
- स्कूल परिणामों पर पड़ा असर जिससे छात्रों का भी मनोबल गिरा
- अक्टूबर-नवंबर, 2015 में वेरिफिकेशन किए हुई गेस्ट टीचरों को तुरंत नियुक्ति देकर जहां भी पद खाली हों वहां भेजा जाए
- प्राइमरी शिक्षकों के पदों को पुनः 17 से 24 किया जाए
नई दिल्ली। नई पीढ़ी-नई सोच संस्था लगतार जनता की भलाई के लिए नए-नए कार्य कर रही है और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर जनता के लिए कुछ न कुछ मांग करती रहती है। इसी कड़ी में संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया व शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर सर्वोदय बाल विद्यालय, बुलंद मस्जिद, शास्त्री पार्क स्कूल में पीजीटी के स्थायी शिक्षकों को भेजने की मांग की है क्योंकि यहां पर पिछले दो सालों से पीजीटी अध्यापकों के स्थान पर टीजीटी अध्यापकों से छात्रों को पढ़वाया जा रहा है। इस सत्र में पीजीटी की पोस्ट तो बना दी गई है परंतु इस सत्र में भी पता नहीं कब तक पीजीटी के स्थायी या गेस्ट टीचर आएंगे।
उन्होंने पत्र के शुरुआत में लिखा कि सर्वोदय बाल विद्यालय, बुलंद मस्जिद, शास्त्री पार्क स्कूल जो कि नोर्थ-ईस्ट जोन-5 व गांधीनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है यहां पर सत्र 2014-15 में 11वीं कक्षा की शुरुआत की गई थी। इस सत्र में 11वीं कक्षा को यहां के टीजीटी अध्यापकों द्वारा पढ़वाया गया था और वही स्थिति सत्र 2015-16 में भी रही। इस सत्र में भी पीजीटी के स्थान पर टीजीटी अध्यापकों ने पढ़ाया और अब सत्र 2016-17 सत्र शुरू हो गया है। इस वर्ष भी पीजीटी अध्यापकों की पोस्ट तो बना दी गई परंतु अभी तक यह नहीं पता इन पदों पर गेस्ट टीचर या स्थायी अध्यापक आएंगे और यह कब तक आएंगे पता नहीं।
उन्होंने पत्र में आगे लिखा कि शिक्षा विभाग के अनुसार जब किसी भी स्कूल में 11वीं कक्षा की शुरुआत होती है तो वहां पर पहले वर्ष पीजीटी की पोस्ट नहीं होती परंतु दूसरे वर्ष में पीजीटी की पोस्ट बना दी जाती है। लेकिन दूसरा वर्ष में भी यहां पीजीटी की पोस्ट नहीं बनाई गई। इसके लिए कौन जिम्मेदार है इसकी कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है। इन 2 सालों में टीजीटी अध्यापकों ने इन छात्रों को कैसे पढ़ाया होगा। यह आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि टीजीटी अध्यापकों ने छात्रों को कितना पढ़ाया होगा क्योंकि यह अपने विषय में तो माहिर हो सकते हैं परंतु दूसरे विषय में शायद नहीं। जिस कारण स्कूल परिणामों पर असर पड़ता है और छात्रों का भी मनोबल गिरता है क्योंकि वह उस विषय में तभी अच्छा जान सकते हैं जब उस विषय का अध्यापक उन्हें पढाए लेकिन पीजीटी अध्यापक ने होने के कारण यह उन छात्रों के लिए मुश्किल है। अभी इसी स्कूल के 11वीं के परीक्षा परिणाम को देखें तो परिणाम संतोषजनक आया है परंतु यहां पर पीजीटी अध्यापक होते तो यह रिजल्ट 100 फीसदी आता और बच्चों का मनोबल बढ़ता। इस संतोषजनक परिणाम के लिए यहां के प्रधानाचार्य श्री चांद बाबू और उन टीजीटी अध्यापकों की काफी मेहनत है जिन्होंने अपने विषय के अलावा इन्हें पीजीटी का विषय पढ़ाया।
उन्होंने आगे लिखा कि हमारी संस्था चाहती है कि यहां पर जो भी पीजीटी या टीजीटी अध्यापक भेजे जाएं वह स्थायी हों, जिससे आने वाले समय में यह स्कूल दिल्ली के टाॅप स्कूलों में आए। संस्था यह भी चाहते हैं कि जिन गेस्ट टीचरों की अक्टूबर-नवंबर, 2015 में वेरिफिकेशन हुई थी परंतु उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई उन्हें तुरंत नियुक्ति देकर ऐसे स्कूलों में भेजा जाए जहां अध्यापकों की कमी है। दिल्ली सरकार के काफी सारे स्कूल में पद रिक्त हैं और वह अध्यापक भी काफी लंबे समय से खाली घूम रहे हैं जिनकी अक्टूबर-नवंबर, 2015 में वेरिफिकेशन हुई थी।
उन्होंने पत्र के अंत में लिखा कि संस्था आपसे अनुरोध करती है कि सर्वोदय बाल विद्यालय, बुलंद मस्जिद, शास्त्री पार्क स्कूल में जो भी अध्यापक भेजें वह स्थायी हों क्योंकि गेस्ट टीचरों का कुछ पता नहीं कब कहां किस स्कूल में चले जाएं। यहां पर पिछले साल के मुकाबले प्राइमरी शिक्षकों के पदों में भी कटौती कर दी गई है कृपया करके उन्हें पुनः 17 से 24 कर दिया जाए क्योंकि यहां पर पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है और नए सत्र के एडमिशन भी शुरू हो चुके हैं।
Wednesday, 30 March 2016
Tuesday, 29 March 2016
नई पीढ़ी-नई सोच संस्था ने आर्ड-ईवन फार्मूले को सफल बनाने के लिए दिए सुझाव
- पहले आर्ड-ईवन फार्मूले की सफलता के लिए सरकार का तेह-दिल से धन्यवाद दिया।
- संस्था ने सरकार से साझा किए विचार ताकि प्रदूषण पर कामयाबी मिल पा सके।
- जिन्हें फार्मूले में छूट मिले उन्हें पेट्रोल या सीएनजी गैस प्रदूषण जांच के प्रमाण पत्र के बाद मिले
- लगभग 20 से 30 प्रतिशत गाडि़यां इतना प्रदूषण छोड़ती हैं कि यह पूरे फार्मूले को ही विफल कर देती हैं।
- इससे सरकार को भी राजस्व होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
नई दिल्ली। नई पीढ़ी-नई सोच संस्था जनता की भलाई के लिए रोजाना नए-नए कार्य जैसे पोलियो कैंप, नेत्र चिकित्सा कैंप, मतदाता पहचान पत्र कैंप आदि का आयोजन करके जनता व सरकार की मदद करती है। इसी कड़ी में संस्था ने एक और कार्य किया है। संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने दिल्ली सरकार के आर्ड-ईवन फार्मूले को सफल बनाने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व परिवहन मंत्री गोपाल राय जी को पत्र लिखकर कुछ सुझाव दिए हैं।
पत्र के शुरू में संस्था के अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने दिल्ली सरकार के आर्ड-ईवन फार्मूले की सफलता के लिए संस्था की ओर से दिल्ली सरकार का तेह-दिल से धन्यवाद दिया है और आशा की है कि 15 अप्रैल से लागू हो रहे आर्ड-ईवन फार्मूले को भी सफलता मिले।
1 जनवरी से 15 जनवरी तक चले पहले और आर्ड-ईवन फार्मूले में संस्था के सदस्यों ने कई चीजों का बारीकी से अध्ययन किया था जिससे प्रदूषण में कमी आए परंतु प्रदूषण में कमी ना आने के कारण का जब पता चला तो हमारी संस्था ने इस बात को सरकार से साझा करने की सोची। यदि सरकार को लगे कि यह भी प्रदूषण का कारण है तो इस पर विचार करें ताकि जिसके लिए आर्ड-ईवन फॉर्मूला लागू किया जा रहा है वह पूर्ण रूप से इस पर कामयाब हो सकें अर्थात् प्रदूषण में कमी आए।
उन्होंने आगे लिखा कि हमारी संस्था के कई सारे पदाधिकारियों व सदस्यों ने इस आर्ड-ईवन फामूले में देखा कि जो गाडि़यां सड़क पर थी अर्थात जिन्हें इस आर्ड-ईवन फार्मूले में छूट मिली थी वह गाडि़या काफी प्रदूषण छोड़ रही थी, जिनमें डीटीसी की बसें भी थीं। जिस कारण प्रदूषण में अधिकतम कमी नहीं आ रही थी इसलिए संस्था चाहती है कि इस आर्ड-ईवन फार्मूलेे में जो भी गाड़ी रोड पर चले अर्थात जिन्हें इस फार्मूले में छूट मिले उन्हें पेट्रोल या सीएनजी गैस तभी दी जाए जब उनके पास प्रदूषण जांच का प्रमाण पत्र हो क्योंकि लगभग 20 से 30 प्रतिशत गाडि़यां इतना प्रदूषण छोड़ती हैं कि यह पूरे फार्मूले को ही विफल कर देती हैं।
पत्र में उन्होंने आगे लिखा है कि यदि इस आर्ड-ईवन फार्मूले में यह फार्मूला भी लागू कर दिया जाए कि पेट्रोल या गैस तभी मिलेगी जब उस व्यक्ति के पास वैध प्रदूषण जांच का प्रमाण पत्र होगा तो उससे अवश्य प्रदूषण में कमी आएगी और जो लोग प्रदूषण की जांच नहीं करवाते हैं वह लोग भी प्रदूषण की जांच अवश्य करवाएंगे। इससे सरकार को भी राजस्व होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी। इसी के साथ यह फार्मूला भी बनाया जाए कि कितना प्रतिशत प्रदूषण का स्तर हो। प्रदूषण के एक पैमाने के बाद यदि प्रदूषण स्तर अधिक पाया जाता है तो उसे गैस व पेट्रोल नहीं दिया जाए।
पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि इस फार्मूले के लागू होने से बहुत सारी गाडि़यां अपने आप रूट से हट जाएंगी और प्रदूषण पर भी स्थायी रूप से नियंत्रण पा सकेंगे।
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