Friday, 13 July 2012

उर्दू शिक्षकों की अनुबंध आधार पर नियुक्ति में सीटेट (CTET) में छूट की मांग

नई दिल्ली। नई पीढ़ी-नई सोच संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष साबिर हुसैन ने उप-राज्यपाल महोदय, श्रीमती शीला दीक्षित (मुख्यमंत्री), श्री अरविंद सिंह लवली (शिक्षा मंत्री), शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर मांग की है कि उर्दू शिक्षकों की अनुबंध आधार पर नियुक्ति में सीटेट(CTET) में छूट की मांग है। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट (CTET)) को अनिवार्य किया गया है, जिसमें उर्दू शिक्षक व अन्य शिक्षक न के बराबर पास हैं। ऐसे में उर्दू की पढ़ाई पूरे साल कैसे होगी यह चिंता का विषय बन गया है।
    उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में सरकार व शिक्षा विभाग की ओर से अनुबंध आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई है जिसमें सभी के लिए केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट (CTET)) को अनिवार्य किया गयाहै, जिसमें उर्दू शिक्षक व अन्य शिक्षक न के बराबर पास हैं। ऐसे में उर्दू की पढ़ाई पूरे साल कैसे होगी यह चिंता का विषय बन गया है। उर्दू को हिन्दी के बाद दूसरा स्थान दिया गया है परंतु इसकी ओर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है। इसी कारण इसके साथ लगातार भेदभाव होता रहा है। आज भी कई ऐसे स्कूल हैं जहां 100 या 100 से अधिक उर्दू पढ़ने वाले मुस्लिम छात्र हैं परंतु वहां अभी तक उर्दू शुरू नहीं की गई है और अब  सीटेट(CTET) का बहाना बनाकर सरकार उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति नहीं करना चाहती। सरकार व शिक्षा विभाग को पता है कि सीटेट(CTET) का रिजल्ट क्या है और इसमें उर्दू पढ़ाने वाले शिक्षक कितने पास हुए हैं।
  उन्होंने आगे पत्र में लिखा है कि अगर सरकार व शिक्षा विभाग सीटेट(CTET) परीक्षा पहले से कार्यरत स्थायी शिक्षकों पर भी लागू कर दें तो आधे से अधिक शिक्षक इस परीक्षा में फेल हो जाएंगे और पढ़ाने योग्य शिक्षक स्कूलों में बचेंगे ही नहीं। जो स्कूलों में पढ़ाने योग्य होंगे वह संख्या में बहुत ही कम होंगे जिससे सरकारी स्कूलों की पूर्ति ही नहीं हो सकेगी। इसलिए सरकार को एक बार पुनः विचार करना चाहिए।
    उन्होंने बताया कि सभी स्कूलों में संस्कृत पढ़ने वाले संस्कृत के स्थायी शिक्षक मौजूद हैं चाहे वहां 20-30 बच्चें ही संस्कृत पढ़ने वाले क्योंने हों परंतु आज भी कई ऐसे स्कूल हैं जहां 100 या 100 से अधिक उर्दू पढ़ने वाले मुस्लिम छात्र हैं परंतु वहां अभी तक उर्दू शुरू नहीं की गई है स्थायी उर्दू शिक्षको की बात दूर की सोच है। ज्यादातर स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सरकार व शिक्षा विभाग सिर्फ इस पर खानापूर्ति करता नजर आता हैं मगर इस पर कोई ठोस कार्यवाही करने कोतैयार नहीं है।
    उन्होंने पत्र में बताया है कि आज के समय में उर्दू का स्तर जिस तेजी से गिर रहा है उस का कारण अधिकतर स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं व पर्याप्त मात्रा में उर्दू की किताबें भी मौजूद नहीं हैं। उर्दू शिक्षक स्कूल में न होने के कारण बच्चों को कितनी परेशानी हो रही है इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल ही नहीं न मुमकिन है, क्योंकि आप लोगों की उर्दू के प्रति बेरूखी से तो यही लगता है कि आप लोग उर्दू को तरजीह हीनहीं देना चाहते और बड़ी-बड़ी बात करके जनता में यह दिखाना चाहते हैं कि हम उर्दू के प्रति कितने फिक्रमंद हैं।
    उन्होंने पत्र में बताया है कि अनुबंध आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया के रिजल्ट को देखा जाए तो ज्यादातर स्कूलों में उर्दू शिक्षकों ने सीटेट(CTET) की अनिवार्यता के कारण आनलाइन फार्म ही नहीं भरे। जिस कारण आज स्कूलों में उर्दू शिक्षक नदारद हैं।
    उन्होंने पत्र के आखिर में कहा कि सभी स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति के लिए केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा सीटेट(CTET) की अनिवार्यता की पाबंदी हटा दी जाए और दुबारा सर्कुलर जारी करके उर्दू शिक्षकों की भर्तीके लिए विज्ञापन दें। जिससे ज्यादा से ज्यादा उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति हो सके वरना पूरा सत्र बिना उर्दू का गुजरेगा।

Saturday, 7 July 2012

साबिर हुसैन (राष्ट्रीय अध्यक्ष)

 
  • Name : Sabir Hussain
  • Father's Name :  Late Mohd. Yusuf
  • Add. : A-201, Buland Masjid, Shastri Park, Delhi-110053
  • D.O.B :  
  • Age : 35 Year  
  • Nationality : Indian                                                                        
  • Qualification : 12th
  • Birth place : Bihar                                                                           
  • Contact : 9971172186 
  • E-mail : s9971172186@gmail.com                                                   
  • I.Card No. : 1 
  • Blood Gurup :                                                                                    
  • Issued On. : 14-7-2010 
  • Valid Up to : Life Time                                                                     
  • Designation : National President


Saturday, 23 June 2012

शास्त्री पार्क में लाइब्रेरी खोलने की मांग

नई दिल्ली। नई पीढ़ी-नई सोच संस्था के संस्थापक अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पूर्वी दिल्ली की महापौर डॉ. अन्नपूर्णा मिश्रा, विधायक अरविंदर सिंह लवली, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के सचिव, धर्मपुरा वार्ड की निगम पार्शद तुलसी को पत्र लिखकर शास्त्री पार्क में लाइब्रेरी खोलने की मांग की है। उन्होंने पत्र में लिखा कि यहां पढ़ने लिखने वाले स्कूली बच्चों, बड़े-बुजुर्ग लगभग 40-50 हजार हैं जो कि लाइब्रेरी चालू होने के कारण  दूसरी जगहों पर किताबें आदि पढ़ने जाते हैं जिससे उन्हें कभी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। षास्त्री पार्क दो निगम भागों में बांट हुआ है धर्मपुरा वार्ड उस्मानपुर वार्ड। यहां की जनसंख्या लगभग 3-4 लाख के बीच है परंतु यहां एक लाइब्रेरी नहीं है।
पत्र में बताया कि धर्मपुरा वार्ड (233) में शास्त्री पार्क क्षेत्र आता है। इसमें लगभग 16-17 हजार मतदाता लगभग दो लाख की आबादी है। यहां पर एक समुदाय भवन है जिसका उद्घाटन लगभग सात-आठ साल पहले मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित, सांसद संदीप दीक्षित, स्थानीय विधायक चौ. मतीन अहमद, स्थानीय निगम पार्षद जमीर अहमद मुन्ना एमसीडी के कई अधिकारियों ने किया था। जब विधानसभा सीलमपुर (49) सीलमपुर वार्ड (91) सांसद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में था। अब यह धर्मपुरा वार्ड (233), विधानसभा गांधीनगर (61) सांसद क्षेत्र पूर्वी दिल्ली है।
उन्होंने पत्र में कहा कि इस समुदाय भवन में लाइब्रेरी का कमरा बना है मगर आज तक यहां पर लाइब्रेरी शुरू नहीं हुई। यहां पढ़ने लिखने वाले स्कूली बच्चों, बड़े-बुजुर्ग लगभग 40-50 हजार हैं जो कि लाइब्रेरी चालू होने के चलते दूसरी जगहों पर किताबें आदि पढ़ने जाते हैं जिससे उन्हें कभी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने आगे लिखा यदि यहां पर शादी-विवाह सामाजिक समारोह के कारण लाइब्रेरी शुरू करने में परेशानी आती है तो कहीं और लाइब्रेरी शुरू करा दें, क्योंकि यह क्षेत्र काफी बड़ा है परंतु अभी तक यहां पर एक भी लाइब्रेरी नहीं है।
उन्होंने कहा कि वैसे शादी-विवाह सामाजिक समारोह तो यहां पर कभी-कभी होते हैं बाकी समय (लगभग 9-10 महीने) यह बंद ही रहता है और जो बुकिंग की जाती है, उसमें भी लाइब्रेरी कक्ष जो बना है वह भी बंद ही रहता है। इसमें  लाइब्रेरी खोल दी जाए जब भी यहां पर शादी-विवाह सामाजिक समारोह हो तो लाइब्रेरी में नोटिस लगाकर सूचित कर दें कि लाइब्रेरी इतनी तारीख को बंद रहेगी।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर समुदाय भवनों में किसी ने किसी का आफिस बना है वहां तो किसी को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आती जैसे राजगढ़ के समुदाय भवन में गांधी नगर विधानसभा (61) मतदाता पहचान पत्र आफिस है, ऐसे ही और भी आफिस समुदाय भवनों में हैं।
उन्होंने कहा कि यदि यहां लाइब्रेरी चालू हो गई तो यहां पढ़ने-लिखने वाले बच्चों, बड़े बुजुर्गों को दूसरी जगह नहीं जाना पड़ेगा। इससे उनका समय तो बचेगा परेशानी भी खत्म हो जाएगी।

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